भाजपा की दिल्ली में हुई दो दिवसीय
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने
विदाई भाषण के साथ एक तरह से 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों का शंखनाद
कर दिया.
इसके साथ ही बीजेपी अब पूरी तरह से चुनाव अभियान के मूड में उतर जाएगी.राष्ट्रीय कार्यकारिणी से यह सीधा संदेश दे दिया गया कि पूरी तरह से कांग्रेस पर निशाना साधा जाएगा और राजनीतिक रणनीतियों के तौर पर चुनावों में आक्रामक रुख बरकरार रखा जाएगा.
इसका उदाहरण भी हमें इसी बैठक में देखने को मिला जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर हमलावर रुख़ अख़्तियार करते हुए विशेष रूप से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के वित्त मंत्री और गृह मंत्री रहे पी.चिंदबरम को निशाने पर लिया.
इस मामले में चिंदबरम को विशेष तौर पर इसलिए सामने रखा गया क्योंकि उनकी छवि एक अंग्रेज़ी बोलने वाले और सभ्रांत वर्ग से आने वाले व्यक्ति के रूप में है.
इस वर्ग को आमतौर पर मोदी के ख़िलाफ़ समझा जाता है. चिंदबरम की पृष्ठभूमि में ही अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा भी शामिल हो जाते हैं.
अमित शाह ने एकबार फिर साफ़ कर दिया कि उनकी पार्टी का ट्रंम्प कार्ड मोदी और उनका चमत्कारिक नेतृत्व है.
पार्टी के नेतृत्व में किसी तरह के बदलाव की क्षणिक आशंकाओं को भी उन्होंने अपने इस बयान के साथ दूर कर दिया.
कार्यकारिणी में यह भी साफ़ हो गया कि 2019 के चुनाव में बीजेपी के चाणक्य और रणनीतिकार अमित शाह ही रहेंगे. यह साफ़ संकेत है कि इन चुनावों में बीजेपी एक पूरी तरह से तैयार सेना के तौर पर उतरेगी जिसकी कमान मोदी और शाह संभालेंगे.
पिछले कुछ सालों में मोदी और शाह ने अपने नेतृत्व से पार्टी कैडर को अपनी अजेय छवि का साफ़ संदेश दिया है.
यही रणनीति थी जिसके दम पर नरेंद्र मोदी ने साल 2001 से तक गुजरात में राज किया.
दिल्ली में हुई बैठक के साथ अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को इस बात के लिए आश्वस्त किया कि वे विपक्ष की बातों में ना आएं और इतना यक़ीन रखें कि जीत उनकी ही होगी.
कार्यकारिणी के अंतिम दिन शाम को जब मोदी ने बैठक को संबोधित किया तो उन्होंने भी अपने भाषण से पार्टी के अजेय होने के संदेश को ही सबके सामने रखा.
'अजेय भारत और अटल बीजेपी' यह नारा बहुत-ही ध्यान रखकर गढ़ा गया है जिससे भारत में बीजेपी की पहचान को बताया जा सके.
यह नारा शाइनिंग इंडिया की तरह नहीं है जिसमें एक तरह का घमंड और अहंकार छिपा हुआ था. 'अजेय भारत और अटल बीजेपी' का नारा एक धर्मनिरपेक्ष नारा लगता है जिसमें राष्ट्रीयता का पुट भी छिपा हुआ है साथ ही संघ परिवार की विचारधारा भी देखने को मिलती है.
निश्चित तौर पर यह बैठक पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए एक संदेश था, आने वाले चुनावों से पहले उनमें जोश भरने की एक कोशिश थी.
इस बैठक के ज़रिए यह बताने की कोशिश की गई कि बीजेपी देश निर्माण करने वाली पार्टी है.
बीजेपी और संघ परिवार में होने वाली ट्रेनिंग के बारे में बताया जाना इस बात का सूचक है कि पार्टी अपने कैडर के मन में यह छवि गढ़ने की पूरी कोशिश कर रही है कि देश के निर्माण में बीजेपी ही सबसे अहम है.
लेकिन जो लोग यह सोच रहे हैं कि बीजेपी सिर्फ़ मोदी की उपलब्धियों को गिनाने भर से ही रुक जाएगी, वो दरअसल एक बड़ी चूक कर रहे हैं.
2019 के चुनाव से पहले अपने कार्यकर्ताओं का इस तरह मनोबल बढ़ाना और उनको मानसिक रूप से चुनाव के लिए तैयार करना, एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है.
अटल बिहारी वाजपेयी की याद के बहाने पूरे देश के कार्यकर्ताओं को एकसाथ जोड़ने का कार्यक्रम चल रहा है.
इसके अलावा दूसरा कार्यक्रम लोगों को यह समझाना कि मोदी सरकार और उससे पहले नेहरू-गांधी परिवार के नेतृत्व में चली कांग्रेस सरकार में कितना फ़र्क है.
बीजेपी अपने लाखों कार्यकर्ताओं की सेना के दम पर देश भर में मोदी सरकार की उपलब्धियों को बताने का काम करेगी.
जिस तरह से बीजेपी ने अपने संगठन को फैलाया यह उसकी नेतृत्व क्षमता का ही कमाल है और नेतृत्व की यही कमी कांग्रेस और उसके गठबंधन में नज़र आती है.
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दो दिन तक चली इस कार्यकारिणी बैठक में आने वाले चुनावी संघर्ष की एक झलक भर दिखी है. अभी तो हमें सांसें रोक कर इस संघर्ष के क्लाइमैक्स का इंतज़ार करना है.
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित
शाह ने रविवार को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कहा कि 2019 में
लोकसभा चुनाव तो वह जीतेंगे ही और उसके बाद 50 सालों तक कोई उन्हें हरा
नहीं पाएगा.
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आखिरी दिन रविवार को
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के संबोधन के बारे में केंद्रीय
क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया को जानकारी दी.रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'यह कोई अहंकार नहीं है, यह बात प्रदर्शन के आधार पर कही जा रही है.'
कार्यकारिणी में अमित शाह ने 2019 का चुनाव जीतने के लिए नौ करोड़ कार्यकर्ताओं से कहा कि वे 22 करोड़ परिवारों के घरों में जाएं और सरकार के साढ़े चार साल के कार्यों को प्रमुखता से रखें.
अगले महीने 2 अक्तूबर को रिटायर हो रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने इच्छामृत्यु पर अहम टिप्पणी की है.
चीफ़ जस्टिस का कहना है कि क़ानूनी तौर पर कोई भी व्यक्ति आत्महत्या नहीं कर सकता, लेकिन किसी को भी सम्मान के साथ मरने का अधिकार है.
शनिवार को पुणे में 'संवैधानिक अधिकारों के संतुलन' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में चीफ जस्टिस मिश्रा ने कहा, ''अगर कोई इंसान कभी न ठीक होने वाली बीमारी से पीड़ित है और वह इच्छामृत्यु चाहता है तो वह इसके लिए अपनी 'लिविंग विल' बना सकता है. हर व्यक्ति का अपना अधिकार है कि वह अंतिम सांस कब ले और इसके लिए उस पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए.''
राजधानी दिल्ली के मोती नगर इलाके में सीवर की सफ़ाई के दौरान पांच मजदूरों की मौत हो गई.
जानकारी के मुताबिक डीएलएफ़ निर्माणाधीन सोसाइटी में पांच कर्मचारी सफ़ाई के लिए सीवर में उतरे थे. एक सफ़ाईकर्मी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
पांचों कर्मचारी सफ़ाई के दौरान बेहोश हो गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था जहां सभी की मौत हो गई.ट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों के विरोध में कांग्रेस ने आज भारत बंद की कॉल दी है.
कांग्रेस का दावा है कि उन्हें 21 दलों का समर्थन हासिल है. बंद का समर्थन करने वाले दलों में सपा, बसपा, डीएमके समेत 21 दल हैं.
कर्नाटक सरकार ने बंद के चलते सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टी का एलान कर दिया है. सरकारी दफ़्तरों में भी छुट्टी रहेगी.
लेकिन दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार इस बंद में शामिल नहीं है.व द चिल्ड्रन चैरिटी के मुताबिक संघर्षरत देशों में 5 लाख से ज़्यादा लड़के और लड़कियों की इस साल भूख से मौत हो जाएगी क्योंकि संघर्ष में शामिल पक्ष उनकी मदद रोक रहे हैं.
चैरिटी का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार संघर्ष की मार झेल रहे देशों में सिर्फ़ पिछले साल में 1400 बार सहायता रोकी गई थी और साल 2012 के मुकाबले ये आंकड़े दोगुने हैं.
चैरिटी के मुख्य कार्यकारी केविन वॉटकिन्स का कहना है कि भूख को युद्ध का हथियार बनाना अब सामान्य हो गया है.
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